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आँखों का सूखापन और स्क्रीन पर काम: कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

ड्राई आईडॉ. स्वाति गोयल · 18 अप्रैल 2024 · 8 मिनट

जब आँख में आँसू की मात्रा कम हो, उनकी गुणवत्ता अच्छी न हो, या आँसू जल्दी सूख जाएँ — तब आँख में सूखापन होता है। यह बहुत आम है, और स्क्रीन पर बीतते घंटों ने इसे और आम बना दिया है।

सूखापन किन कारणों से होता है

  • बढ़ती उम्र — खास तौर पर 50 वर्ष से अधिक की महिलाओं में, हार्मोनल बदलावों के चलते।
  • ऑटोइम्यून बीमारियाँ, जैसे शोग्रेन सिंड्रोम, ल्यूपस और रुमेटॉइड आर्थराइटिस।
  • कुछ दवाइयाँ, जिनके साइड इफ़ेक्ट में आँख का सूखापन आता है — ज़्यादातर सर्दी-खाँसी की दवाएँ और एंटीडिप्रेसेंट।
  • विटामिन ए की कमी।
  • ज़्यादा धूम्रपान।
  • लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनना, और देर तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना।

लक्षण

  • आँख में किरकिरी जैसी चुभन।
  • आँख में लाली।
  • आँख को लंबे समय तक खुली रखने में कठिनाई।
  • सुबह उठने पर आँख का चिपचिपा महसूस होना।

स्क्रीन पर काम करने से क्या होता है

लगातार स्क्रीन पर काम करने से सिर में दर्द, आँख में दर्द, लाली, जलन और पानी आना शुरू होता है। ध्यान केंद्रित करने और साफ़ देखने में दिक्कत होती है, आँख देर तक खोलने में तकलीफ़ होती है, और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, लगातार स्क्रीन देखने से आँख की मांसपेशियाँ थक जाती हैं। दूसरा, आँसू की परत अस्थिर हो जाती है, जिससे आँख में सूखापन पैदा होता है।

बीस-बीस-बीस का नियम

हर 20 मिनट पर 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फ़ीट दूर किसी चीज़ को देखें। इससे आँख की अंदरूनी मांसपेशियाँ ढीली पड़ती हैं, आँख झपकती है, आँसू की परत ठीक रहती है — और आप ताज़गी के साथ काम पर लौटते हैं।

घर और दफ़्तर में क्या बदलें

  • स्क्रीन को आँखों के स्तर से थोड़ा नीचे रखें। इससे आँख पूरी चौड़ी खुली नहीं रहती और आँसू की परत जल्दी नहीं सूखती।
  • कमरे की रोशनी संतुलित रखें — न इतना अंधेरा कि आँख पर ज़ोर पड़े, न इतनी तेज़ रोशनी कि स्क्रीन पर परछाई पड़े।
  • ह्यूमिडिफ़ायर लगाएँ। हवा में नमी बढ़ने से सूखापन कम होता है।
  • वर्कस्पेस साफ़ और धूल-मुक्त रखें।
  • भरपूर पानी पिएँ। शरीर में पानी की कमी सीधे आँख की नमी पर असर डालती है।
  • पोश्चर ठीक रखें। काम तो करना ही है — पर पीठ और गर्दन की स्थिति गलत रहे तो कमर और गर्दन का दर्द अलग से खड़ा हो जाता है।

चश्मा और कोटिंग

सबसे पहले नेत्र विशेषज्ञ से जाँच कराएँ। अगर हल्का सा भी नंबर है तो चश्मा नियमित पहनें। उस पर ब्लू-रे या एंटी-ग्लेयर कोटिंग लगवाने से अतिरिक्त फ़ायदा मिलता है।

खाने में क्या शामिल करें

ओमेगा-3 और विटामिन ए से भरपूर चीज़ें आँसू की परत को तंदुरुस्त रखने में मदद करती हैं — मछली, अंडे, गाजर, कद्दू, शकरकंद, पालक, सिट्रस फल, एवोकाडो, चिया और अलसी के बीज, अखरोट और बादाम।

ओमेगा-3 फ़ैटी एसिड के सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं। आर्टिफ़िशियल टियर्स यानी लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स बिना पर्चे के मिल जाती हैं — प्रिज़र्वेटिव वाली और बिना प्रिज़र्वेटिव वाली, दोनों।

अगर यह सब करने के बाद भी सूखापन ठीक न हो, तो नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएँ। वे टियर फ़िल्म ब्रेक-अप टाइम और शिर्मर टेस्ट जैसी जाँचें करेंगे और उसके अनुसार इलाज तय करेंगे।

यह लेख सामान्य जानकारी है। अपनी आँखों के लिए डॉक्टर से मिलें।

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