जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बढ़ा रहता है — 140/90 से ऊपर — तो यह आँख के टिशू और आँख की बड़ी रक्त वाहिकाओं, दोनों को प्रभावित करता है।
दो तरह से नुकसान होता है
- वेज़ो-स्पाज़्म — ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ने पर वाहिका सिकुड़ जाती है, जिससे आगे के टिशू को रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है।
- क्रॉनिक आर्टीरियोस्क्लेरोटिक बदलाव — वाहिका की दीवार मोटी होती जाती है और अंत में वाहिका बंद हो जाती है।
वाहिका बंद होने पर आगे के टिशू तक रक्त नहीं पहुँचता और वह मरना शुरू हो जाता है। साथ ही क्षतिग्रस्त वाहिकाएँ रिसने और रक्तस्राव करने लगती हैं — जिससे आँख में हेमरेज, एक्सुडेट और कॉटन-वूल स्पॉट बनते हैं। कुल मिलाकर यह सब निगाह घटाते हैं।
लक्षण
सिर में दर्द, आँख के अंदर और आँख के चारों तरफ़ दर्द या भारीपन, और साथ में निगाह कम होना।
दो डॉक्टरों को दिखाना होगा
एक तो नेत्र विशेषज्ञ, जो पुतली फैलाकर पूरे पर्दे की जाँच करें। और दूसरा आपके फ़िज़िशियन, जो आपके सभी वाइटल ऑर्गन और वाइटल साइन जाँचें और उसी हिसाब से दवा लिखें।
इलाज
मुख्य बात है ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना। जैसे ही प्रेशर काबू में आता है, पर्दे के अंदर जो नुकसान शुरू हुआ था वह धीरे-धीरे पलटने लगता है — हालाँकि इसमें काफ़ी लंबा वक्त लगता है।
लेकिन अगर नुकसान पर्दे के मैक्युला या ऑप्टिक नर्व तक पहुँच चुका है, तो यह लंबे समय के लिए निगाह को प्रभावित करता है। इसीलिए देर करना भारी पड़ता है।
अपना नियमित इलाज लेते रहें और बीच-बीच में फ़ॉलो-अप कराएँ — क्योंकि कभी-कभी वही दवा आगे चलकर कम असर करने लगती है।
यह लेख सामान्य जानकारी है। अपनी आँखों के लिए डॉक्टर से मिलें।
