काला मोतिया उन बीमारियों का समूह है जिनमें आँख की ऑप्टिक नस को नुकसान होता है। यही नस आँख को दिमाग से जोड़ती है, ताकि आँख में आ रही रोशनी दिमाग तक पहुँचे और दिमाग उस चित्र को पहचान सके।
जब यह नस कमज़ोर हो जाती है, तो रोशनी आँख तक तो पहुँचती है — लेकिन दिमाग उसे पहचान नहीं पाता।
काले मोतिया का ऐसा कोई एक लक्षण नहीं है जिससे आप खुद पहचान लें कि यह आपको है या नहीं। पहचान सिर्फ़ जोखिम के कारणों और जाँच से होती है।
जोखिम के कारण
- ब्लड प्रेशर, मधुमेह, दिल की बीमारी या माइग्रेन।
- परिवार में पहले से किसी को काला मोतिया होना — इससे आगे की पीढ़ी में खतरा बनता है।
- दूर या नज़दीक की निगाह बहुत ज़्यादा कमज़ोर होना।
- किसी बीमारी के चलते लंबे समय तक स्टेरॉइड्स का सेवन।
- पहले आँख का कोई ऑपरेशन या आँख में लगी चोट।
आँकड़े क्या कहते हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने काले मोतिया को अंधेपन का दूसरा सबसे अहम कारण बताया है। वीडियो में साझा किए गए 2023 के आँकड़ों के अनुसार दुनिया भर में इसके लगभग 8 करोड़ मामले थे, जिनमें से करीब 1.2 करोड़ भारत में।
संख्या जो भी हो, बात एक ही है — यह बीमारी आम है, और भारत में इसका बोझ बड़ा है।
अच्छी खबर
काले मोतिया की रोकथाम संभव है। अलग-अलग तरह की दवाइयाँ यानी आई ड्रॉप्स, लेज़र ट्रीटमेंट और सर्जरी — तीनों विकल्प उपलब्ध हैं।
बचाव का तरीका सीधा है — नियमित रूप से नेत्र विशेषज्ञ से आँख की जाँच कराते रहें।
और एक अनुरोध: अपने परिजनों और आसपास के लोगों को भी काले मोतिया के बारे में बताएँ। इस बीमारी में जानकारी ही सबसे कारगर बचाव है।
यह लेख सामान्य जानकारी है। अपनी आँखों के लिए डॉक्टर से मिलें।
