केराटोकोनस ग्रीक शब्द है — केरैटो यानी कॉर्निया, हमारी आँख की काली पुतली, और कोनस यानी शंकु। जब आँख की काली पुतली शंकु जैसी शेप ले ले, उस स्थिति को केराटोकोनस कहते हैं।
हमारी आँख की कुल फ़ोकसिंग पावर का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा कॉर्निया सँभालता है — इसलिए उसकी शेप बदलने का सीधा असर निगाह पर पड़ता है।
होता क्या है
कॉर्निया के अंदर एंटीऑक्सीडेंट एंज़ाइम की कमी के कारण कोलाजन के फ़ाइबर टूटने लगते हैं और कॉर्निया कमज़ोर होने लगता है। उसका बीच का हिस्सा पतला हो जाता है और सतह पर अनियमितताएँ आने लगती हैं।
जो चिकना, गोल कॉर्निया पहले पर्दे पर चित्र को साफ़ फ़ोकस कर रहा था, वह अब असामान्य शेप के कारण निगाह की स्पष्टता को प्रभावित करता है।
लक्षण
- जो निगाह अब तक चश्मे के साथ ठीक चल रही थी, उसमें गिरावट महसूस होना — और यह गिरावट चश्मे से भी सुधरती नहीं।
- सिलिंड्रिकल नंबर बहुत ऊँचा रहना, यानी हाई एस्टिग्मैटिज़्म।
- एडवांस केसेस में निगाह में डिस्टॉर्शन आना।
किसे ज़्यादा जोखिम है
अध्ययनों में एशियाई आबादी में केराटोकोनस का जोखिम काफ़ी अधिक — वीडियो में साझा किए गए आँकड़े के अनुसार लगभग चार गुना — पाया गया है। यह आमतौर पर किशोरावस्था के आसपास शुरू होता है और युवावस्था में बढ़ता है।
- जिन्हें फ़ुक्स डिस्ट्रोफ़ी, रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा, डाउन सिंड्रोम, या एलर्जिक अस्थमा और हे फ़ीवर है।
- वे बच्चे जो अपनी आँख बहुत ज़्यादा रगड़ते हैं — आगे चलकर उनमें केराटोकोनस विकसित होने का जोखिम रहता है।
इलाज
केराटोकोनस का इलाज उपलब्ध है और कई विकल्प हैं — कॉर्नियल क्रॉस-लिंकिंग, इंटैक्स, और इम्प्लांटेबल कॉन्टैक्ट लेंस।
सभी विकल्पों का लक्ष्य एक ही है — कॉर्निया की सतह को फिर चिकना और गोल बनाना, और अनियमितताओं तथा शंकु जैसी शेप को कम से कम करना।
अगर आपकी या आपके बच्चे की निगाह चश्मे से भी ठीक नहीं हो रही, या सिलिंड्रिकल नंबर तेज़ी से बदल रहा है, तो नेत्र विशेषज्ञ से कॉर्निया की जाँच कराएँ। समय पर पकड़ने से बढ़ना रोका जा सकता है।
यह लेख सामान्य जानकारी है। अपनी आँखों के लिए डॉक्टर से मिलें।
