सफ़ेद मोतिया बहुत आम शब्द है। हमें आमतौर पर इतना मालूम रहता है कि बढ़ती उम्र के साथ जैसे बाल सफ़ेद होते हैं और झुर्रियाँ आती हैं, वैसे ही आँख में सफ़ेद मोतिया बनता है।
आँख के अंदर एक पारदर्शी लेंस होता है। उम्र के साथ यह धुँधला पड़ जाता है और निगाह फ़ॉगी हो जाती है — जैसे शीशे पर धूल-मिट्टी जम गई हो। कुछ लोग इसे ऐसे बताते हैं कि निगाह के सामने जाला आ रहा है।
असल में हो क्या रहा है
जन्म से हमारा लेंस पारदर्शी होता है — रोशनी उसमें से आर-पार निकल जाती है। लेकिन उम्र बढ़ने या किसी और कारण से लेंस को नुकसान पहुँचने पर उसके प्रोटीन फ़ाइबर बदलने लगते हैं। लेंस धुँधला हो जाता है और रोशनी आर-पार नहीं जा पाती।
उम्र के अलावा और कारण
केवल बढ़ती उम्र ही नहीं — कई और कारण हैं जिनसे कम उम्र में भी सफ़ेद मोतिया बन सकता है।
- बचपन में या कभी भी आँख पर चोट लगना।
- आँख का कोई पिछला ऑपरेशन — जैसे काले मोतिया या पर्दे की सर्जरी।
- मधुमेह। शुगर के मरीज़ों में सफ़ेद मोतिया समय से पहले बन सकता है।
- किसी स्किन प्रॉब्लम या दूसरी बीमारी के लिए ओरल या टॉपिकल स्टेरॉइड्स का सेवन।
- पहाड़ी इलाकों में रहना, जहाँ बर्फ़ से परावर्तित यूवी किरणों का ज़्यादा सामना होता है।
इलाज
सफ़ेद मोतिया का इलाज सर्जरी है — आँख में एक छोटा सा कट देकर धुँधला लेंस बाहर निकाला जाता है और उसकी जगह नया लेंस डाला जाता है।
आजकल जिसे आम भाषा में "दूरबीन" या "लेज़र" से सर्जरी कहा जाता है, वह असल में फ़ेको इमल्सिफ़िकेशन है। इसमें फ़ोल्डेबल लेंस डाला जाता है। सबसे आम फ़ोल्डेबल लेंस मोनोफ़ोकल होता है — यह दूर की निगाह ठीक करता है, और नज़दीक के काम के लिए आपको चश्मा लगाना पड़ सकता है।
लेंस के कई और विकल्प भी हैं, और सर्जरी की तकनीकें भी एक से ज़्यादा हैं। इन पर विस्तार से हमारी अगली पोस्ट में — सर्जिकल तकनीकें और लेंस के प्रकार।
यह लेख सामान्य जानकारी है। अपनी आँखों के लिए डॉक्टर से मिलें।
