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सफ़ेद मोतिया की सर्जरी की तकनीकें और लेंस के प्रकार

सफ़ेद मोतियाडॉ. स्वाति गोयल · 18 अक्टूबर 2024 · 6 मिनट

सफ़ेद मोतिया की सर्जरी में मुख्य रूप से दो तकनीकें अपनाई जाती हैं, और उसके बाद यह तय करना होता है कि आँख में कौन सा लेंस डाला जाए। दोनों फ़ैसले आपकी आँख और आपकी ज़िंदगी के हिसाब से लिए जाते हैं।

तकनीक 1: मैनुअल स्मॉल इंसीज़न सर्जरी (एसआईसीएस)

यह सर्जरी लगभग 5.5 से 7 मिलीमीटर का कट लगाकर की जाती है। इसे "स्मॉल इंसीज़न" इसलिए कहते हैं कि पहले जब कैटरैक्ट सर्जरी होती थी तो 10 से 12 मिलीमीटर का कट दिया जाता था और टाँके लगाए जाते थे। उसकी तुलना में यह कट छोटा है — इसीलिए यह नाम पड़ा।

  • टाँकों की ज़रूरत नहीं होती।
  • हीलिंग अच्छी होती है — करीब दस दिन में शुरू हो जाती है।
  • अगर मोतिया बहुत पका हुआ है यानी एडवांस कैटरैक्ट है, तो सर्जन आमतौर पर यही तकनीक चुनते हैं।

तकनीक 2: फ़ेको इमल्सिफ़िकेशन

फ़ेको में एक प्रोब होती है जिसके अंदर पीज़ो-इलेक्ट्रिक क्रिस्टल लगा होता है। यह अल्ट्रासोनिक ऊर्जा से सफ़ेद मोतिया को छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटकर बाहर निकालता है। इसमें कट केवल दो से ढाई मिलीमीटर का दिया जाता है।

  • रिकवरी और हीलिंग का समय बहुत कम होता है — मरीज़ जल्दी ठीक होता है।
  • नतीजे अच्छे रहते हैं, और चश्मे का नंबर एसआईसीएस की तुलना में कम आता है, क्योंकि कट का साइज़ छोटा है।

लेंस के प्रकार

सर्जरी हो जाने के बाद आँख में लेंस डालना होता है, और यहाँ कई विकल्प उपलब्ध हैं।

मोनोफ़ोकल लेंस

सबसे पहले आता है मोनोफ़ोकल लेंस। यह भारतीय कंपनियों का भी उपलब्ध है और आयातित भी — मेड इन यूएसए, जापान, जर्मनी।

जो लोग ज़्यादा समय धूप में या खेत में बिताते हैं — जैसे किसान या ड्राइवर — उन्हें चौंध यानी ग्लेयर की दिक्कत आ सकती है। ऐसे मरीज़ों के लिए आमतौर पर येलो-कोटेड लेंस पसंद किया जाता है, जिसमें अतिरिक्त यूवी किरणें छन जाती हैं और आँख में उतनी ही रोशनी पहुँचती है जितनी देखने के लिए ज़रूरी है।

मल्टीफ़ोकल लेंस

प्रीमियम विकल्पों की तरफ़ जाएँ तो मल्टीफ़ोकल लेंस आते हैं। आम भाषा में समझें तो यह प्रोग्रेसिव चश्मे जैसा है, जिसमें दूर और नज़दीक दोनों का नंबर होता है। इसमें रिंग्स के ज़रिए दूर की निगाह ठीक की जाती है, और बीच का क्लियर ज़ोन नज़दीक की निगाह सँभालता है।

मल्टीफ़ोकल लेंस चुनने पर सर्जरी के बाद चश्मे पर निर्भरता बहुत कम हो जाती है — रोज़मर्रा के ज़्यादातर कामों के लिए चश्मे की ज़रूरत नहीं पड़ती।

कौन सी तकनीक और कौन सा लेंस आपके लिए सही है, यह आपकी आँख की जाँच के बाद ही तय हो सकता है। अपने नेत्र विशेषज्ञ से हर विकल्प का फ़ायदा और खर्च खुलकर पूछें — और यह भी कि आपके काम के हिसाब से क्या ज़्यादा उपयुक्त रहेगा।

यह लेख सामान्य जानकारी है। अपनी आँखों के लिए डॉक्टर से मिलें।

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