
स्मॉग वाले दिनों में आँखों में जलन, लाली, पानी आना और किरकिरापन ज़्यादातर आँख की ऊपरी सतह की जलन होती है, इन्फ़ेक्शन नहीं। धुएँ से बचने, आँखों को साफ़ पानी से धोने और लुब्रिकेटिंग ड्रॉप से यह अक्सर ठीक हो जाता है। अगर दर्द हो, पलक झपकाने पर भी धुंधलापन न जाए, गाढ़ा कीचड़ आए, या दो-तीन दिन में आराम न मिले, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
स्मॉग से आँखें क्यों जलती हैं
आँख के सामने वाले हिस्से पर आँसुओं की एक पतली परत होती है, जो आँख को चिकना और आरामदायक रखती है। धुआँ, धूल और स्मॉग के बारीक कण (PM2.5) इस परत पर जम जाते हैं और इसे तोड़ देते हैं। आँख की सतह जगह-जगह सूख जाती है और जलन, लाली और अक्सर ज़्यादा पानी आने लगता है। यह पानी आँख का ख़ुद को धोने का तरीका है — इसका मतलब यह नहीं कि आँख में नमी पूरी है।
स्मॉग अक्सर सुबह जल्दी और शाम को, सर्दियों के ठहरे हुए दिनों में और ट्रैफ़िक के पास सबसे ज़्यादा होता है।
किन्हें ज़्यादा परेशानी होती है
- जिन्हें पहले से आँखों का सूखापन या आँख की एलर्जी है
- कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले
- दोपहिया वाहन चलाने वाले, या बाहर और ट्रैफ़िक के पास काम करने वाले
- बुज़ुर्ग और बच्चे
- जिनका हाल ही में आँख का ऑपरेशन हुआ है
- जो घंटों स्क्रीन देखते हैं — स्क्रीन देखते समय हम कम पलक झपकाते हैं
क्या मदद करता है
- बंद आँखों पर साफ़, ठंडे पानी के छींटे दिन में दो-तीन बार, ख़ासकर बाहर से आने के बाद।
- लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप (आर्टिफ़िशियल टियर्स) सतह को आराम देती हैं। अगर दिन में चार बार से ज़्यादा डालनी पड़ें, तो प्रिज़र्वेटिव-फ़्री ड्रॉप बेहतर है।
- ठंडी सिकाई — साफ़ कपड़ा ठंडे पानी में भिगोकर कुछ मिनट बंद आँखों पर रखें।
- बाहर चश्मा या धूप का चश्मा पहनें, और दोपहिया पर हेलमेट का वाइज़र नीचे रखें। इससे धूल और हवा काफ़ी हद तक आँखों तक नहीं पहुँचती।
- ख़राब हवा वाले दिनों में कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें, चश्मा पहनें।
- हवा बहुत ख़राब हो तो, ख़ासकर सुबह-शाम, घर के अंदर रहें और उस समय खिड़कियाँ बंद रखें।
- स्क्रीन से ब्रेक लें: हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के लिए दूर देखें और पूरी पलक झपकाएँ।
- पानी भरपूर पिएँ।
क्या न करें
- आँखें न रगड़ें। एक पल को आराम लगता है, पर जलन बढ़ती है और सतह पर खरोंच आ सकती है।
- डॉक्टर की सलाह के बिना स्टेरॉयड ड्रॉप या "लाली हटाने वाली" ड्रॉप न डालें। अपने आप स्टेरॉयड ड्रॉप डालने से आँख का प्रेशर बढ़ सकता है और काला मोतिया या मोतियाबिंद हो सकता है। लाली हटाने वाली ड्रॉप बस कुछ देर के लिए लाली छिपाती है।
- आँख में घरेलू नुस्ख़े न डालें — बाज़ार का गुलाबजल, दूध, घी या शहद से कीटाणु जा सकते हैं।
- किसी और की ड्रॉप न डालें, और खोलने के एक महीने बाद बोतल इस्तेमाल न करें।
डॉक्टर को तुरंत कब दिखाएँ
- आँख में दर्द, या रोशनी देखने पर दर्द
- धुंधलापन जो पलक झपकाने पर भी न जाए
- पीला या हरा गाढ़ा कीचड़, या सुबह पलकें चिपकी हुई
- आँख में कुछ चला गया और अब भी है, या चोट लगी है
- हाल ही में आँख का ऑपरेशन हुआ है
- ऊपर बताए तरीकों से दो-तीन दिन में आराम नहीं
अगर आपको काला मोतिया (ग्लूकोमा) है, तो उसकी ड्रॉप पहले की तरह डालते रहें। लुब्रिकेटिंग ड्रॉप भी डालनी हो, तो दोनों के बीच लगभग पाँच मिनट का अंतर रखें।
आम सवाल
क्या यह आँख आना (कंजंक्टिवाइटिस) है?
अक्सर नहीं। स्मॉग की जलन दोनों आँखों में एक साथ होती है, घर के अंदर आराम मिलता है और गाढ़ा कीचड़ नहीं आता। आँख आना अक्सर एक आँख से शुरू होकर दूसरी में फैलता है और चिपचिपा कीचड़ आता है। पक्का न हो तो आँख की जाँच करवाएँ।
क्या केमिस्ट से ड्रॉप ले सकते हैं?
सादी लुब्रिकेटिंग ड्रॉप (आर्टिफ़िशियल टियर्स) ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है। जिस ड्रॉप में स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक या लाली हटाने वाली दवा हो, वह सिर्फ़ डॉक्टर की सलाह से डालें।
क्या मास्क आँखों को बचाता है?
मास्क फेफड़ों को बचाता है, आँखों को नहीं। आँखों के लिए चश्मा या चारों तरफ़ से ढकने वाला धूप का चश्मा ज़्यादा काम आता है।
इस मौसम में बच्चे की आँखें हर सुबह लाल रहती हैं, क्या करें?
ठंडा पानी, ख़राब हवा वाले दिनों में बाहर कम जाना, और आँख न रगड़ना। लाली बनी रहे, या बच्चा धुंधला दिखने या दर्द की बात करे, तो आँखों के डॉक्टर को दिखाएँ।
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स्क्रीन की वजह से पहले से आँखें सूखी रहती हैं? पढ़ें आँखों का सूखापन और स्क्रीन। अगर आँखों की परेशानी बनी रहे और आप अस्पताल न आ सकें, तो डॉ. स्वाति से वीडियो कॉल पर पूछ सकते हैं।
यह लेख सामान्य जानकारी है। अपनी आँखों के लिए डॉक्टर से मिलें।