
आँखें मलने वाले ज़्यादातर बच्चे थके होते हैं, उन्हें आँख की एलर्जी होती है, या वे देर तक स्क्रीन देखते हैं। आराम, कम स्क्रीन और घर की आसान देखभाल से यह अक्सर ठीक हो जाता है। लेकिन अगर बच्चा रोज़ आँखें मलता है, आँखें सिकोड़कर देखता है, किताब बहुत पास रखता है या धुंधला दिखने की बात करता है, तो उसे चश्मे की ज़रूरत हो सकती है — आँखों की जाँच करवाएँ। सालों तक ज़ोर से और बार-बार आँखें मलने से आँख का अगला हिस्सा कमज़ोर भी हो सकता है, इसलिए यह आदत छुड़वाना ज़रूरी है।
बच्चे आँखें क्यों मलते हैं — आम वजहें
- थकान और नींद। सोने से पहले या दिन भर के बाद आँखें मलना सामान्य है।
- आँख की एलर्जी। मुख्य लक्षण खुजली है — अक्सर लाली, पानी और धागे जैसा कीचड़ भी; धूल वाले मौसम में, पालतू जानवरों के पास या बसंत में ज़्यादा। ऐसे बहुत से बच्चों को छींकें या नाक बहने की शिकायत भी होती है।
- स्क्रीन। फ़ोन और टैबलेट देखते समय बच्चे कम पलक झपकाते हैं। आँखें सूखती और थकती हैं, और बच्चा मलने लगता है।
- नज़र की कमज़ोरी। जो बच्चा साफ़ नहीं देख पाता, वह देखने के लिए ज़ोर लगाता है। इससे आँखें थकती हैं, सिरदर्द होता है और बच्चा आँखें मलता है। बच्चे शायद ही कहते हैं "मुझे दिखता नहीं" — उन्हें लगता है सबको ऐसे ही दिखता है।
- आँख में कुछ चला जाना — धूल, पलक का बाल या रेत। अक्सर एक आँख में, अचानक पानी के साथ।
- आँख का इन्फ़ेक्शन (आँख आना)। लाल आँख और पीला या हरा चिपचिपा कीचड़, अक्सर एक आँख से दूसरी में फैलता है।
कब आँखों की जाँच करवाएँ
- बच्चा सिर्फ़ नींद में नहीं, रोज़ आँखें मलता है
- देखने के लिए आँखें सिकोड़ता है, सिर टेढ़ा करता है या एक आँख बंद करता है
- टीवी के बहुत पास बैठता है, या किताब और फ़ोन बहुत पास रखता है
- स्कूल या होमवर्क के बाद सिरदर्द या आँखों में थकान की शिकायत
- टीचर बताते हैं कि बच्चा बोर्ड नहीं पढ़ पाता
- एक आँख अंदर या बाहर मुड़ती है, कभी-कभी भी
- पढ़ते समय लाइन छूट जाती है, या बच्चा पढ़ने से बचता है
घर पर क्या मदद करता है
- बंद आँखों पर ठंडा पानी या ठंडी सिकाई खुजली में आराम देती है।
- नाख़ून छोटे और हाथ साफ़ रखें। गंदे हाथों से मलने पर इन्फ़ेक्शन फैलता है।
- स्क्रीन से ब्रेक: हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के लिए दूर देखें। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए मनोरंजन वाली स्क्रीन दिन में लगभग एक घंटा रखें, छोटे बच्चों के लिए इससे कम।
- रोज़ दो घंटे दिन की रोशनी में बाहर खेलना बच्चों की आँखों के लिए अच्छा है।
- पूरी नींद।
- एलर्जी हो तो: तकिए के कवर अक्सर धोएँ, पालतू जानवर को सोने के कमरे से बाहर रखें, और बहुत धूल वाले दिनों में खिड़कियाँ बंद रखें।
- प्यार से आदत छुड़वाएँ: बच्चे को आँख मलते देखें तो उसकी जगह ठंडा पानी या साफ़ टिशू दें।
क्या न करें
- डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चे की आँख में कोई ड्रॉप न डालें। केमिस्ट से मिलने वाली कुछ एलर्जी ड्रॉप में स्टेरॉयड होता है, जिससे आँख का प्रेशर बढ़ सकता है और काला मोतिया या मोतियाबिंद हो सकता है — बच्चों में भी।
- आँख में घरेलू नुस्ख़े न डालें — बाज़ार का गुलाबजल, दूध, शहद या काजल।
- अगर हफ़्तों तक आँखें मलना जारी रहे, तो अनदेखा न करें।
बार-बार आँखें मलना क्यों मायने रखता है
सालों तक, दिन में कई बार ज़ोर से आँखें मलने से कॉर्निया — आँख की सामने वाली साफ़ खिड़की — कमज़ोर और पतला हो सकता है। कुछ बच्चों में, ख़ासकर एलर्जी वाले बच्चों में, यह केराटोकोनस से जुड़ा है, जिसमें कॉर्निया शंकु की तरह उभर जाता है और नज़र धुंधली और टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है। एलर्जी का इलाज और आदत जल्दी छुड़वाने से आँख सुरक्षित रहती है। केराटोकोनस के बारे में और पढ़ें।
डॉक्टर को तुरंत कब दिखाएँ
- आँख में चोट, या कुछ ऐसा चला गया जो धोने से न निकले
- दर्द, या बच्चा रोशनी में आँख खोलना न चाहे
- अचानक धुंधलापन
- गाढ़ा कीचड़, सूजी पलकें या बुख़ार
- आँख अचानक अंदर या बाहर मुड़ने लगे
आम सवाल
बच्चे की पहली आँखों की जाँच किस उम्र में करवाएँ?
स्कूल शुरू होने से पहले, लगभग 3-4 साल की उम्र में, पहली जाँच अच्छी है — आँख मुड़ती दिखे या माता-पिता का चश्मे का नंबर ज़्यादा हो तो पहले भी। उसके बाद हर एक-दो साल में, या जैसा डॉक्टर कहें।
क्या चश्मा लगाने से बच्चे की आँखें और कमज़ोर हो जाएँगी?
नहीं। चश्मा बच्चे को साफ़ दिखाने में मदद करता है और आँखों को कमज़ोर नहीं करता। जिन बच्चों का नंबर बढ़ता रहता है, उन्हें नियमित जाँच चाहिए; इसे धीमा करने के तरीकों के बारे में डॉक्टर से पूछें।
क्या आँख की एलर्जी ठीक हो सकती है?
यह अक्सर मौसम के साथ लौट आती है, लेकिन डॉक्टर की सही ड्रॉप और घर की आसान सावधानियों से अच्छी तरह काबू में रहती है।
बच्चा सिर्फ़ रात को आँखें मलता है। क्या यह समस्या है?
नींद में आँखें मलना सामान्य है। अगर दिन में भी हो, या खुजली, लाली या कम दिखने के साथ हो, तो जाँच करवाएँ।
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और पढ़ें आँख की एलर्जी और आँखों का सूखापन और स्क्रीन पर काम के बारे में। पक्का नहीं कि बच्चे को दिखाना ज़रूरी है? डॉ. स्वाति से वीडियो कॉल पर पूछें।
यह लेख सामान्य जानकारी है। अपनी आँखों के लिए डॉक्टर से मिलें।